Jhoot Mat Bolo Shayari

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Jhoot Mat Bolo Shayari

बेहिसाब झूठ कहा तो खुदा मान बैठे,
जरा सा सच बोल दिया तो बुरा मान बैठे..!!

झूठ बोलने में सबसे बड़ी परेशानी,
यह है कि झूठ याद रखने पड़ते है..!!

जिंदगी के बाजार में इश्क का कर्जदार देखा,
सच्ची मोहब्बत में आज झूठा दिलदार देखा..!!

भरोसेमंद इंसान पर सच्चाई का असर बेहद ही कम हो जाता है,
झूठ बोलने से महबूब के दिल में अपने लिए प्यार कम हो जाता है..!!

झूठ बोलना इंसान में पाई जाने वाली,
कई बुराइयों में से एक है..!!

छोटी चीज को झूठ बोलकर बड़ा नही करते है,
झूठ के दम पर सपनो का महल खड़ा नही करते है..!!

झूठ बोलने से सच छुपता नहीं,
घड़ी बंद होने पर समय रूकता नहीं..!!

काश जान जाता तुम्हारे प्यार के इरादों को,
याद करता हूं मैं तुम्हारे उन झूठे वादों को..!!

चाहत में झूठ बोलकर आज मेरा दिल तोड़ दिया,
झूठी कसम खाकर उसने अपना ईमान भी बेच दिया..!!

सच बोलना बहुत आसान होता है लेकिन,
अपने बारे में सच सुन पाना बहुत मुश्किल..!!

मुझे तसल्ली हो जाएगी तुम्हारे झूठ से भी,
कह दो के कभी इश्क़ था तुम्हें मुझसे..!!

सच कड़वाहट लिए मुँह खोलता है,
झूठ को देखो कितना मीठा बोलता है..!!

झूठ बोलकर भी अब लोग दिल चुराते है,
सच बोलने वाले दीवाने ठोकरे खाते है..!!

माना झूठ बोलकर तुम तरक्की कर लोगे,
अंतिम समय में तुम खुदा को क्या जवाब दोगे..!!

सब झूठ है यहाँ,
बस यही एक सच है..!!

कभी-कभी झूठ बोलना मजबूरी नहीं बीमारी भी होती है..!!

झूठ की तारीफ़ सच का मजाक,
कुछ ऐसा है आजकल दुनिया का मिजाज..!!

इन्सान जब दिल के हाथों मजबूर होता है,
तो झूठे प्यार पर भी बड़ा गूरूर होता है..!!

सब कुछ झूठ होता है फिर भी सच्चा लगता है,
इश्क़ में जान बूझकर धोखा खाना भी कितना अच्छा लगता है..!!

दिखावे की जरूरत तो झूठ को होती है,
सच के लिए तो सच्चाई की रौशनी ही काफी होती है..!!

तेरे झूठे वादे का मैं कब तक सबर करूं,
ये आंखें तो बन्द कर लूं पर दिल का क्या करूं..!!

हर इंसान जरुरत और मौके के अनुसार,
कभी न कभी झूठ बोलता ही है..!!

सीख रहा हूँ मैं भी अब मीठा झूठ बोलने का हुनर,
कड़वे सच ने हमसे, ना जाने, कितने अज़ीज़ छीन लिए..!!

ऊँचें आसमान से मेरी जमीन देख लो,
तुम ख्वाब आज कोई हसीन देख लो,
अगर आजमाना है ऐतबार को मेरे तो,
एक झूठ बोलो और मेरा यकीन देख लो..!!

ज़रुरत पड़े तो झूठ कभी – कभी बर्दाश कर लीजिए,
लेकिन झूठा आदमी कभी बर्दाश मत कीजिए..!!

महबूब का दिल तोड़ कर क्या हासिल होगा,
चाहत में झूठ बोलकर तुम्हें क्या हासिल होगा?

खुदा की इबादत झूठे वादे करने की इजाजत नहीं देती,
मोहब्बत में किसी को झूठ बोलने की जरूरत नहीं होती..!!

तुम्हारे हर झूठ को मैं सच मानती हूँ,
जबकि सच क्या है? ये मैं बहुत अच्छी तरह से जानती हूँ..!!

झूठ के नाव सच के समंदर में चलते नही,
झूठ बोलने वाले अपना स्वभाव बदलते नही..!!

कुछ लोग बड़े बेशर्मी से आँखों में आँखें डाल कर भी झूठ बोलते है..!!

कोई एक बार झूठ बोले तो माफ़ कर दीजिए,
दोबारा बोले तो सतर्क हो जाइये..!!

अगर कभी झूठ बोल देने से किसी का दिल टूटने से बच जाए,
तो ऐसे झूठ में कोई बुराई नहीं है..!!

सच छुपाना भी झूठ बोलने के सामान होता है..!!

झूठ बहुत तेजी से फैलता है,
और सच को मेहनत करनी पड़ती है..!!

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